गणेश चतुर्थी व्रत

आप जानते हैं कि गणेश चतुर्थी की तिथि हर महीने आती है और वह भी दो बार, जो की विनायक चतुर्थी और संकष्ठी चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। गणेश चतुर्थी 2016 विनायक चतुर्थी और संकष्ठी चतुर्थी को विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़िए, विघ्नहर्ता आपके सभी दुख और परेशानियों को दूर करते है। गणेश चतुर्थी एक प्रचलित दिन है जब भगवान गणेश की पूजा की जाती है, प्रभु गणेश समृद्धि, सौभाग्य और बुद्धि के देवता है। यह माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान हुआ था।

संकष्ठी चतुर्थी

संकष्ठी चतुर्थी सबसे शुभ माना जाता है। यह हिन्दू तिथि के अनुसार महीने के कृष्ण पक्ष के चौथे दिन पड़ती है। संकष्ठी चतुर्थी तमिलनाडु में संकटहरा चतुर्थी के रूप में मनायी जाती है। अगर संकष्ठी चतुर्थी की तिथि मंगलवार को पड़ती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक चतुर्थी को श्रद्धालुओं भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए व्रत उपवास करते है।

दिसम्बर 17- शनिवार- संकष्ठी चतुर्थी

विनायक चतुर्थी

विनायक चतुर्थी 'वरद विनायक चतुर्थी' के नाम से भी प्रचलित है। शब्द वरद का मतलब 'वरदान' है। जो लोग इस शुभ दिन पर पूरे मन और विश्वास तथा विधि विधान से व्रत करते है उन पर सर्वशक्तिमान गणपति द्वारा शक्ति और बुद्धि की बौछार होती है। और वे व्यक्ति अपने सभी पूर्ववत कार्यों को पूरा कर लेते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन गणेश पूजा दोपहर समय की जानी चाहिए, जो दिन के मध्य का समय है।

दिसम्बर 3- शनिवार- विनायक चतुर्थी

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

सभी देवतायो के ऊपर कई विपत्तियाँ आ पड़ी तो उन्होंने भगवान शिव की शरण ली तथा उनसे मदद मांगी। देवतायो की आपबीती सुनकर शिव जी ने निर्णय लिया कि कार्तिकेय और गणेश में से कोई एक इस समस्या का निवारण करेगा परंतु दोनों ही शिव पुत्र अपने अपने छेत्र में निपुण और इस कार्य के लिए सक्षम थे तो भोले नाथ ने एक प्रतियोगिता रखी और कहा की उसमे जो उत्तीर्ण होंगे वही देवतायो की मदद करेंगे, भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा लेते हुए कहा कितुम दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके सबसे पहले आएगा वही देवताओं की मदद करने जाएगा। कार्तिकेय का वाहन जो मोर् था जिसकी गति गणेश जी के वाहन चूहे से तीव्र थी तो इस कारण गणेश जी सोच में पड़ गए कि इस तरह तो में विजय नहीं हो पाउँगा। तत्पश्चात उन्होंने अपने बढ़ि से एक निर्णय निकाला और अपने माता-पिता जो कि शिव-पार्वती जी के 7 परिक्रमा लगाकर अपने स्थान पर बैठ गए। उसके पश्चात जब कार्तिकेय पूरी पृथ्वी का भ्रमण कर लौटे तो भगवन शिव ने गणेश जी से पृथ्वी की परिकृमा ना करने का कारण पूछा तब गणेश ने कहा - 'माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।' इस प्रकार भगवान शिव ने गणेशजी को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसे पुत्र-पौत्रादि, धन-ऐश्वर्य की कमी नहीं रहेगी तथा उसके सभी संकट समाप्त हो जायेंगे। एवं साथ ही साथ देवताओं के संकट दूर करने की आज्ञा दी।

गणेश चतुर्थी व्रत विधि

नारद पुराण के अनुसार चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए, अगर आप पूरा दिन उपवास करने में सक्षम नहीं है तो आप फल,साबूदाना,आलू या कोई और फलाहार का सेवन भी सकते है। रात के समय गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुनकर चन्द्रोदय होने पर गणेश जी का पूजन पुरे विधि विधान से करने के बाद, चन्द्रमा को अर्घ्य देकर स्वयं भोजन करना चाहिए। इस दिन गणेश जी का व्रत-पूजन करने से धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है और समस्त परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय…
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय…

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