शुभ मुहूर्त

हम जब भी कोई काम करते है तो उसके सकारात्मक प्रभाव के बारे में सोचते है और ईश्वर से प्रार्थना करते है की हमें अच्छे परिणाम मिले, तथा हमें प्रगति मिले एवं और उन्नति करे। तथा सोचते है की जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्य किया जा रहा है उसमें सफलता हासिल होगी या नहीं।उसके लिए सबसे जरूरी है सही मुहूर्त में कार्य प्रारंभ करना । ज्योतिष आचार्यो के अनुसार ग्रहों की स्थिति और उनकी दशा हमारे सभी कार्यो पर प्रभाव डालती है चाहे वो अच्छे काम हो या बुरे। कभी किसी कार्यो को करने के बाद उसमें असफलता प्राप्त होती है तथा भारी नुकसान होता है जिसका मुख्य कारण हमारे ग्रह ,नक्षत्रो का बिचलित होना हैं। तथा शुभ मुहूर्त का आभाव भी होता है ,इसलिए हमारे बड़े लोग और पंडित जन किसी भी कार्य को शुभ मुहूर्त में करने की सलाह देते हैं।

शुभ मुहूर्त का वास्तविक अर्थ :-

शुभ मुहूर्त को शुभघड़ी भी कहा जाता है। शास्त्र ज्ञातयो के अनुसार किसी भी मांगलिक कार्य को शुरु करने का शुभ मुहूर्त ऐसा समय होता है। जिसमें सम्पूर्ण ग्रह और नक्षत्र शुभ परिणाम देने वाले होते हैं। तथा सभी अड़चने दूर होती हैं। आपके लिये कौनसी घड़ी शुभ रहेगी या फिर कैसे आपके कार्यों में बाधाएं दूर होंगी जानने के लिये सलाह करें हमारी ज्योतिष से और अपने कार्यो को संपन्न करे।अमृत योग सबसे शुभ योग माना जाता है।
कार्यो को बिना किसी विघ्न के करने के लिए जानिए शुभ वार, शुभ महीना, शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र के बारे में।

शुभ मुहूर्त वार के अनुसार :-

सोमवार, बुधवार, गुरुवार शुक्रवार तथा शनिवार सर्वाधिक शुभ दिन माने गए हैं। भूमिपूजन, गृह निर्माण या गृह प्रवेश मंगलवार एवं इतवार को कभी भी प्रारम्भ नहीं करना चाहिए।

शुभ मुहूर्त माह के अनुसार :-

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत चैत्र, आषाढ़, आश्विन तथा कार्तिक माह में बिलकुल ना करे।अगर इसमें कार्य प्रारंभ करते है तो धन की कमी होती है और परिवार के सदस्यों की आयु भी कम होती है। शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन, वैशाख एवं श्रावण महीना सबसे उत्तम तथा शुभ होता है।तथा अन्य बचे शेष महीने मध्यम श्रेणी में आते है।

शुभ मुहूर्त तिथि के अनुसार :-

ये तिथियां अशुभ होती हैं जो इस प्रकार है चतुर्थी, नवमी एवं चतुर्दशी। शुभ तिथियां इस प्रकार है द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी। कोई भी शुभ कार्य इन तिथियों को प्रारम्भ करे।

शुभ मुहूर्त नक्षत्र के अनुसार :-

किसी भी शुभ महीने के रोहिणी, पुष्य, अश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा, स्वाति, हस्तचित्रा, रेवती, शतभिषा, धनिष्ठा सर्वाधिक उत्तम एवं पवित्र नक्षत्र हैं। कोई भी शुभ कार्य जैसे गृह निर्माण , विवाह सम्मलेन, मुंडन, उद्घाटन या उध्यापन इन नक्षत्रों में करना लाभकारी है। अन्य सभी नक्षत्र सामान्य नक्षत्रों की श्रेणी में आ जाते हैं।

वार ,तिथि और नक्षत्र का शुभ मिलाप:-

यदि शुभ वार,तिथि और नक्षत्र का संयोग साथ में बनता है तो यह अति उत्तम शुभ मुहूर्त होता है। तथा इस शुभ मुहूर्त में किये गए कार्य उन्नति की और अग्रसर होते है।ऐसा संयोग कई वर्षों के बाद बनता है जो बेहद लाभकारी होता है।इसमें किये गए कार्य से किसी व्यक्ति विशेष को सफलता ही सफलता मिलती है

जानिए विवाह, वाहन खरीदी और गृह प्रवेश से सम्बंधित शुभ मुहूर्त

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